फिक्र

Hello guys✋
Hope you all doing well😇
काफी टाईम बाद लिख रहा हूँ, या यूँ कहूँ के काफी टाइम बाद कुछ पोस्ट करने जैसा लिखा है।
Sunday post है तो आपको कुछ पॉजिटिव देना चाहता था। तो फ़ोन का Data📶 और Notification📳 ऑफ करके ध्यान से पढियेगा। ज्यादा लेंदी नही हैं। बाकी पोस्ट की तरह आप इससे खुदको जुड़ा हुआ पाएंगे।😊

शर्मा और तिवारी …मेरे दोस्त
अभी कॉलेज को 2nd ईयर ही हुआ होगा ओर मेरे दो सबसे खास दोस्तो को दुनियादारी की फिक्र सी हो चली थी। हालत तो यह थे, के बेचारे कॉलेज में हमारे साथ होते हुए भी किसी अलग ही ख़यालो🤔 में खोये हुए होते थे। यह बिल्कुल ठीक वैसा ही था जैसे हम सभी क्लास या ऑफिस में बैठे बैठे सोचते हैं कि अगर यहां आग लग जाए तो मैं कैसे बचूंगा और लेपटॉप लेकर भागूंगा या यही छोड़ दूंगा।
I mean like इस बात का रियालिटी से कोई लेना देना ही नहीं है और ना ही असल में आग लगने का कोई सीन है। बिल्कुल ऐसा ही मेरे इन दोनो दोस्तो का था।

नोकरी..नोकरी..नोकरी ; सुबह-शाम शर्मा जी का मन नोकरी की ही माला जपता था। वो कैसी होगी, कहा होगी, किस हालत में होगी और कैसे मिलेगी? बस इसी बात की चिंता ओर आंखों में अनगिनत सपने फ़ोन के नोटिफिकेशन की तरह टिपूक, टिपूक होते रहते थे। दिन भर फलाना का इतना पैकेज, उस कंपनी का बड़ा केम्पस और बस उनकी बातें। कई कंपनियों में CV पोहोचाया, जुगाड़ भी लगाई लेकिन करते भी क्या, ग्रेजुएशन के बिना कोई नोकरी देता भी नहीं। आखिर में थक हार गए।

दूसरी तरफ हमारे दूसरे मित्र तिवारी जी, शर्मा जी
की तरह ही इनका भी बिल्कुल वही हिसाव था। वो कैसी होगी, कहा होगी, किस हालत में होगी और कैसे मिलेगी? हाँ लेकिन इन्हें नोकरी की नहीं बल्कि छोकरी को तलाश थी। निहायती सख्त और सिंगल। बचपन से जवानी तक हर लड़की से भैया भैया सुनकर उन्हें तो अब सावन भी जेठ की तरह लगता था। किसी ने कह दिया heppn ओर tinder पर मिलेगी तो भाई साब MP Nagar ओर न्यू मार्केट में चक्कर काटते मिलते। जिम में शेप बनाने, स्पॉ, स्क्रब और दुनिया भर के ताम-झाम लगा लगा कर चेहरे पर मानचित्र ओर बालों में तालाब उभर आये थे। बस यही चिंता उन्हें सताती थी के कोई मिलेगी या अब बस साधू संत बनना ठीक रहेगा….

एक साल बीते और हम सबने कॉलेज खत्म कर लिया। शर्मा जी को बड़ी सी MNC में जॉब मिली, सुनते ही तितली बन उड़े, खूब मिठाइयां बँटी और कुछ ही हफ़्तों में सब कुछ बदल देने का जज़्बा लेकर चल दिए। उधर तिवारी जी के भी बड़ी तलाश के बाद किसी नैना के साथ नैनाचार हुए,
फिर मेसेज पर बातें ओर फोन पर इकरार हुए। कुछ दिनों बाद इजहार ओर फिर शादी।
मतलब दोनो की ही ख्वाहिश कुछ ही सालों बाद पूरी हो गई।

आज 10 साल बीत गए उस बात को
कुछ दिनों पहले शर्मा जी से पूछा ; और शर्मा जी कैसा चल रहा है सब- सुनते ही कॉरपोरेट का रोना रोने लगे। नोकरी के 50 नुकसान सुना गए।
कुछ दिनों बाद मन हुआ पुराने मित्रो से मिलने का तो सोचा तिवारी जी से मिलते आउ…सुबह सुबह की बात थी। उनकी गली में घुसा ही था के सफेद बनियान👕 पहने, हाथ में दूध का खाली डिब्बा टांगे मेरा दोस्त कुत्ता🐈 घुमा रहा था😂😂😂 शक्ल से पत्नी से प्रताड़ित लग रहा था। मिलते ही गले लगा। मैने पूछा और सिंगल बाबू- केसी चल रही है मिंगल लाइफ? मुँह लटका कर कहता है – भाई बस शादी मत करना कभी।😞

मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, अब तक जो मित्र नोकरी के लिए इतना सीरियस था वो नोकरी पाकर भी परेशान था। मतलब जो इंसान कार लेने के सपने देख रहा था वो उसे पाने के बाद मुझे पैदल चलने के फायदे गिना रहा था। वहीं मेरा दूसरा दोस्त जो सारि उम्र लड़की लड़की करता था वो अब मुझे सारि ज़िन्दगी साधु संत बनने की सलाह दे रहा था।

दोस्तो, ये कोई ओर नहीं बल्कि हम-आप की ही जिंदगी है। कहना बस ये था कि जिदंगी हम सबको देर-सबेर नौकरी,प्रेम, कार सब दे देती है। बस पहले वाला उत्साह जो बचा लेता है,वो जिंदगी बचा लेता है। समय से पहले कुछ चीज़ों को पाने की चाहत, हमें उन चीज़ों की अहमियत ही नहीं होने देती जो असल में कीमती है। हम आज की आंखों से कल के सपने देख रहे होते हैं लेकिन यह भूल जातें है “कल” शब्द सिर्फ एक कल्पना मात्र है बल्कि आज एक वास्तविकता। क्या पता वो कल वैसा ना हो या फिर वो कल हो ही ना, जैसा आपने सोचा था। यहाँ मैं यह नहीं कहता कि कल की बिल्कुल भी चिंता ना करें। लेकिन उस चिंता के चलते अपने आज से मिलने वाले उत्साह को भी खत्म ना होने दें।
जिंदगी आज हाथों में मुस्कुरा रही है
क्या पता
कल हो ना हो ।

दोस्तों, आपको यह स्टोरी कैसी लगी? मुझे कमेंट में बताना ना भूलें। आपके कमेंट्स मुझे ऐसे पोस्ट लिखने के लिए inspire करते हैं। तो लाइक, कॉमेंट करिये ओर अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर करें।

धन्यवाद😊

32 thoughts on “फिक्र

Add yours

  1. चिंता से चतुराई घटे,
    घटे रूप और ज्ञान
    चिंता बड़ी अभागिनी,
    चिंता चिता समान
    मेरो चिंतयो होत नहीं
    हरि को चिंतयो होय
    हरि चिंतयो हरि करे
    मैं रहुं निश्चिंत

    Liked by 3 people

      1. It would be great for me, you liked it. Visit my blog post, if you like then follow my blog post & give your valuable suggestion……infact your post are really “Lekhak Babu type”😛

        Liked by 2 people

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Create a website or blog at WordPress.com

Up ↑

Soul to Ink- M.A.Fernández

Poetry, Author, Blogger

The REKHA SAHAY Corner!

Witness What Happens When A Ghalib Loving Psychologist Who Doubles As A Hindi Kaviyatri And Raconteur Sits Down Over A Cup Of Coffee And Coelho By Her Side To Converse About Art, Love, Faith, Philosophy And The Journey Called Life! You're Invited!

%d bloggers like this: